Heart Touching School ka pyar ek adhuri love story

बहुत दिनों बाद एक लंबी School ka pyar love story लिखने की कोशिश करी है मन करे तो पढ़ लो यार…..or….. पता नहीं कैसी लिखी गई है, बोर होओ ना तो बीच में छोड़ देना यार 😂😂😂

 

बात बहुत पहले की है एक था राजा एक थी रानी यह बातें हो गई हैं पुरानी

चलो यार शुरू करते हैं School ka pyar  एक मॉडर्न जमाने का प्यार ::::::

जब मैं आठवीं कक्षा में था तब मैंने एक नए स्कूल का रुख किया। दिलों में अरमानों का मेला था पहले दिन ही ट्रायल के लिए मैं जाकर लास्ट बेंच पर बैठ अकेला था। कभी कोई अंदर आ रहा था कभी कोई क्लास से बाहर जा रहा था और मैं 1 टक से उन सब को निहारे जा रहा था। इतनी ही देर में प्रार्थना के लिए बैल बजती है। मैं उठकर चला और कक्षा के गेट की तरफ बढ़ा तो एक सुंदर सी लड़की हाथ में टिफिन लिए और अपनी दोस्त की तरफ देखकर हाथ हिलाती हुई मेरी तरफ चली आ रही थी। इतनी ही देर में हमारी पहली टक्कर हो जाती है और उसके हाथ से टिफिन छूट गया उसका सर मेरे कंधे पर आकर डट गया। इतनी ही देर में उसकी चश्मा का शीशा दूसरी तरफ फर्श पर जाकर गिर गया। चीजों को उठाया, तुम ठीक हो, माफी , नऐ हो क्या….उधर यह सब फॉर्मेलिटी हुई और इधर प्रार्थना के बाद मेरे दिल कि घंटी बज चुकी थी।

 

प्रार्थना शुरू थी और मेरी मंद सी आंखें खुली थी और मैंने देखा वही लड़की मेरी बराबर कि सिध में हाथ जोड़े भक्ति में लीन थी पर मेरे मन में तो कुछ अलग ही चल रहा था। सारा दिन उसे देखता रहा और शाम होते-होते वह सकूल मुझे पूरी तरह पसंद आ गया था। उस स्कूल में वॉलीबॉल गेम के लिए हॉस्टल था मैं पहले से ही गेम करता था इसीलिए मैंने स्कूल में एडमिशन लेने का सोचा था तो अगले ही दिन मैं सम्मान उठा हॉस्टल में आया। और मुझे वहां जाकर पता चला क्लास में हॉस्टल वालों का अलग ही डिठौरा है‌ शरारती, क्लास में चुप नहीं बैठना। अब वो ठहरी क्लास मॉनिटर तो इस करके हमारी दिन में बहुत बार नोकझोंक हो जाती थी। धीरे-धीरे नोकझोंक से बातें होने लगी। अब मैं उसके साथ बहस भी नहीं करता था उसकी सारी बातें मैं मान लेता था।

 

क्या होता था ना कि महीने में एक शनिवार को स्कूल वालों को बैठाकर हमारा गेम दिखाया जाता था। तो खेलने के बाद वह बोली तुम बहुत अच्छा खेले बड़ी मेहनत करी कल तुम्हारे लिए कुछ बना कर लाऊं। मैंने हां कर दी। अब बातें और भी ज्यादा मीठी होने लगी मुझे भी लगने लगा कि वो भी मेरे प्यार में खोने लगी । मंडे को वह मेरे लिए खिर हलवा लेकर आई और रिसेस में छोटे बच्चों की क्लास में आने को कहा । मैं खाना खा ही रहा था कि चम्मच से थोड़ा बहुत नीचे गिरता है, तो बोलीं तुम्हें खाना भी नहीं आता ला मैं खिला देती हूं। ओहो मैंने एक चम्मच उसके हाथ से जो खाई और बाकी खुद ही फिनिश किया । फिनिश करने के बाद बोला कि हमें तुमसे कुछ कहना है और खाने की तारीफ की और प्रपोज कर दिया। उसकी भी मंद मंद मुस्कुराती होंठों से हां आई। अब हम एक दूसरे के लिए जीने लगे थे। बस अब यह कारवां थोड़ा और चलता गया और फिर क्लास निकल गई।

 

अब अप्रैल में नौवीं कक्षा में एडमिशन लिया ही था।सब बढ़िया चल रहा था। अगस्त में मेरी स्टेट नेशनल टूर्नामेंट आने वाली थी पर मैंने पिछले कुछ दिनों से रियलआइज किया की मेरी परफॉर्मेंस नीचे गिरती जा रही है। जब मैंने यह बात उसे बताई तो उसने पूछा तुम्हें क्या लगता है ऐसा क्यों हो रहा है? मैंने बोला देख अपन देर रात तक बातों में लगे रहते हैं। ना मैं सही से आराम कर पाता हूं और ना ही दिमाग से फोकस कर पा रहा हूं। अभी इसी बात बात पर झगड़ा हो गया तुम कहना क्या चाहते हो यह सब मेरी वजह से हो रहा है ये…वो मैं उसे समझाने में लगा और हमारे बीच ऐसा पहली बार हुआ था मुझे भी गुस्सा आ गया और अंत में हल निकला की बातें बंद। अगस्त में मुझे टूर्नामेंट खेलना था मैं चाहता था कि मैं इन सब बातों को भूल कर थोड़ा आगे बढूं तो मैं मेरे गेम की तैयारी में जुट गया। बीच-बीच में कई बार उससे बात करने की कोशिश करता था पर वह इग्नोर मार देती थी। अगस्त आई में टूर्नामेंट अच्छी गई स्टेट के लिए सिलेक्ट हुआ पर नेशनल तो नहीं खेल पाया। स्टेट खेल से आए तो मुझे स्कूल प्रार्थना में सम्मानित किया । तो मैंने प्रेयर के बाद उसे माफी मांगी हां मेरी गलती थी पर मेरी मजबूरी थी। ओर वो मान गई आज के बाद कभी ऐसा नहीं करोगे बिल्कुल बातें बंद नहीं होगी कम कर सकते हैं और अगले ही दिन वह मुझे मेरी पसंदीदा गज्जक लागे मेरा बैग भर देती है अब वो बड़ी खुश लग रही थी। कुछ दिन और साथ में चलते हैं। अच्छे से मजे लेते हैं अब स्कूल में हर कोई हमारे बारे में जान गया था और धीरे-धीरे नौवीं कक्षा पास हो जाती है।

 

वही अप्रैल और कक्षा बदलती है पर हमें साथ देख कर कुछ लोगों को आग लगती है। वो मुझे ऐसे ही चीजें लाकर खिलाती रहती थी। इतना प्यार की मुझे हॉस्टल में कभी लगा ही नहीं कि मैं मां से दूर हूं। इस बार अगस्त में मैं नेशनल भी खेल आता हूं। मैं बहुत खुश था पर उसके चेहरे पर मुझे इतनी खुशी झलक नहीं रही थी। मैं पूछ भी नहीं सकता था कि तुम खुश क्यों नहीं हो क्योंकि डर लगता था यार वह बुरा मान जाएगी। दो-तीन दिन लगातार ऐसा ही चलता रहा वो बातें तो करती थी पर बातों में वह बात नहीं थी। तो मैंने हिम्मत जुटाकर पूछ ही लिया क्या बात है? बोली तुम मेडल जीत लाए मैं खुश हूं और क्या चाहिए ! वैसे भी मेरे खुद का कोई सपने है नहीं ! मैंने कहां ऐसी क्या बात हो गई ! तुम बताओ तो सही तुम्हें क्या चाहिए। बोली तुम तो गेम करते हो मैं पढ़ती हूं और अच्छे नंबर नहीं आया तो घर वालों को क्या जवाब दूंगी??? तअब मेरा भी पढ़ाई में मन नहीं लग रहा है और ना इतना समय मिल रहा है। मैंने कहा देख मैथ मुझे पूरी आती है मैं करवा दूंगा बाकी देख लिये तेरा। मुझे कुछ नहीं चाहिए तुमसे बस तुम मुझे कुछ समय के लिए अकेला छोड़ दो मुझे तुमसे कुछ नहीं चाहिए ।

अब एकदम से ऐसा बर्ताव समझ ही नहीं आ रहा था। मैं मनाने में लगा बस वो एक की बात की रट लगाए रखी मुझे अकेला छोड़ दो और पढ़ने दो । यार देख पहले लड़ाई हुई थी ना तो तूने ही कहा था हम 1 दिन में कुछ देर तो बात कर सकते हैं पर वो कहां मानने वाली थी उस पर तो अलग ही भूत सवार था और दूरियां बन जाती हैं। क्लास में जाने का बिल्कुल भी मन नहीं करता था । मैं हॉस्टल में ही पड़ा रहता था। अब मुझे लग रहा था कि तब मैंने उसे अलग रहके गलत किया था….. वो कहते हैं ना अकल ठोकर खाकर ही आती है। एसे ही चलते चलते एक दिन मुझे पता चला कि अगस्त से उसने घर पर ट्यूशन भी लगवाया हुआ है और वहां एक लड़का है जो पढ़ने में उसकी ही तरह होशियार है इससे बहुत बातें करता है और हर तरह की मदद करता है। अब मैं समझ आया था कि बात हाथों से जा चुकी है तो मैंने उससे पूछ ही लिया कि तुम्हें उससे बातें करनी है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है पर बता तो दो ???

तो एक खतरनाक सा गुस्सा भरा रिप्लाई आया कभी नहीं देखा था और कहा कि मैंने कभी इस इरादे से उससे बातें करी ही नहीं पर तुमने जो शक किया है ना मुझ पर अच्छा नहीं किया। तुम कितने बार बार खेलने जाते हो मैं तो कभी तुम्हारे साथ नहीं आती….मैं तो नहीं पूछती वहां कौन लड़की थी। तुम्हें सही लगे तो तुम दूर जा सकते हो और मैं करूं तो गलत ( गुस्से से घुर्ते हुए) और हां सुन लो तुमसे तो बहुत अच्छा लड़का है वह कम से कम मेरे साथ तो है मेरी मदद तो करता है जो मुझे दिक्कत हो वह समझता तो है तुम्हारा तो रास्ता ही अलग है बस अपने धुन में मस्त रहते हो।

अब इसके आगे ना मेरे पास कुछ बोलने को बचा था ना कुछ सुनने को बचा था। पता नहीं गलती स्टार्टिंग वाली थी या ये बाद वाली थी और गलत मैं था कि वो थी पर इसी चक्कर में एक और कहानी अधुरी रह गई। 🙏🙏🙏🙏

 

Note –  filmo ki trh real life me hmesa happy ending nhi hoti hai Jaruri nahi sabhi School ka pyar mukambal ho jaye.

Thanks For Reading School ka pyar ek adhuri love story

Please comments & share

Read More

Leave a Comment