Khat By Empty

डियर अनु ,

कैसे हो, मैं जानता हूँ, तुम भी बहुत दिनों से इस नीले आसमान में सफेद गुब्बारों जैसे बादलों के साथ लुका छिपी खेलकर थक चुके हो पर आज जब बगीचे में धूप में खुलकर आया तो लगा जैसे तुमने कुछ देर के लिए बादलों के साथ अपने खेल को विराम दे दिया है, और फिर सुनहरी धूप को देखते हुए मैंने भी कैफे जाने की बजाय हमारे घर के बगीचे की तरफ रूख किया । 

बहुत दिनों से तुम्हें खत्त लिखने की सोच रहा था, पर जैसे ही कलम को हाथ में लेकर कुछ भी लिखने लगता तो ऐसा लगता जैसे, ये सब कुछ पहले खत्तों जैसा ही तो है, वहीं दुख, वहीं दर्द और वहीं घर-कैफे की बातें !! पर आज लगा जैसे है मेरे पास कुछ ऐसा जिसे जानने में तुम्हारी भी दिलचस्पी होगी तो सुनो, हुआ यूं कि हमेशा की तरह कुछ देर के लिए कल ‘ स्नेह कैफे ‘, स्नेह रंगमच में तब्दील हो गया, वजह एक सवाल था, सच कहूं तो कुछ सवालों के जवाब हमारे पास ही होते है, बस हमें ही उनके जवाब ढूंढने में देर हो जाती है, कभी कभी तो इतनी देर हो जाती है कि सवाल पूछने वाला भी हमसे बहुत दूर जा चुका होता है, अपने सवाल के अधूरेपन के बोझ को साथ लेकर ! पर आज मैं तुम्हारे इसी अधूरेपन को दूर करके, तुम्हारे बोझ को कुछ हल्का कर देना चाहता हूँ। 

मुझे याद है, वो रात जब हमारी शादी के बाद पहली बार मुझे ऑफिस से घर आने में देर रात हो गई थी,तुम कितने गुस्से में थी! तुमने सोच लिया था, जब तुम सामने आओगे तो तुम्हारी खैर नहीं होगी, सारी शिकायतों को खाने की जगह डाईनिंग टेबल पर परोसकर तुम्हें अपने गुस्से का शिकार बनाऊंगी पर जब मैं ऑफिस से लौटा तो तुम मुझे  देखकर कुछ कह ही नहीं पायी, जैसे तुमने अपनी भूख को गुस्से का घोल पिलाकर शांत कर लिया हो !
एकतरफ मैं  तुमसे माफी मॉंगते हुए कह रहा था , ” सॉरी, अनु  लेट हो गया ! इमरजेंसी लेट नाईट मीटिंग थी, मजबूरी में रखनी पड़ गयी..जो मींटिग में शामिल शादीशुदा आदमी थे, वो सभी परेशान होते हुए कह रहे थे, ” सर ! आज तो घर पहुँचकर बहाने बनाने पड़ेंगे क्योंकि अगर बोला कि मीटिंग में थे, तो पक्का बीवी शक करेगी ! “, कोई कह रहा था कि वो टायर के पंचर होने का बहाना करेगा तो कोई ट्रैफिक का पर मुझे पता है, मुझे मेरी अनु से झूठ बोलने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है !! “, मैं  कहकर शांत हुआ, तो तुमने डाईनिंग टेबल पर खाना लगा दिया और खुद बिना खाये ऊपर के कमरे में जा पहुंची पर मैं खाना खाने की बजाय कमरे में पहुँचकर तुमसे माफी मॉंगने लगा  पर जैसे उस रात तो तुम्हारे  मुँह में दही जम गया था !! तुम कुछ कह ही नहीं पायी..पर मैं भी कहॉं हार मानने वाले था, तुम्हारा  हाथ पकड़ा और तुम्हें  बालकनी में ले जाकर बिठा दिया.. कहने लगा, ” आज मैं तब तक तुमसे बात करता रहूंगा, जब तक तुम मुझसे कुछ नहीं कहती ! या तो गुस्सा कर लो, या फिर माफी दे दो पर चुप ना रहो !!

मैं सब कुछ समझ रहा था कि, तुम अब मुझे ये कैसे बताते कि तुमने तो मुझे बहुत पहले हि माफ कर चुकी हो, पर तुम उस वक्त कुछ कह हि कहां पा रही थी! मुझे याद है रात के ढाई बजे होंगे जब मैं तुम्से सवाल पे सवाल पूछते पूछते अपने बचपन के किस्से सुनने में लग गया था, और तुम थक कर मेरे कंधे में सिर रखकर सो गए थे। 
उस वक्त मुझे अहसास हुआ कि किसी इंसान की खामोशी आपको किस तरह चुभती है, मैं चाहता था कि तुम्हें उठाऊं और कहूं…  !!
उस दिन के बाद से जब भी मैं ऑफिस से लेट आता, हर बार यही होता.. और फिर थक हारकर सो जाते !,
अरे तुम्हें पता है कल जब कैफे में मुझे यही हमारे रूठने-मनाने के किस्से याद आये तो लगा जैसे मुझे इस सवाल का जवाब मिल गया, एक अरसे से मेरे पास ही तो था, बस मुझे ही नजर नहीं आ रहा था, हॉं, तो जवाब तुम हीं थे.. ‘

मेरी  अनु’, कैसे ? जो मेरी सुई की तरह चुभने वाली चुप्पी को भी बार बार सुनना चाहता हो, उसे संगीत के सात सुरों में बाधें बिना ही एक गीत का रूप देना चाहता हो और शायद इसलिए ही ऑफिस से थककर लौटने पर सोने की बजाय देर रात तक जागने का फैसला करता हो..भला, कौन आज के जमाने में इतना इश्क करता है ? 

तुम्हारा  प्यारा
एम्प्टी ।। 

यह एक काल्पनिक कहानी है, इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक हैं और किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से इस कहानी का कोई लेना देना नहीं है, जगह का नाम, या कोई पदवी अत: सब काल्पनिक हैं किसी के साथ यह दुर्घटना असली जिन्दगी में हुई है तो हमें खेद है

The end ❤️

#Empty !

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