Hamara Prem Ankahe alfaz By Empty

कभी कभी ना समझ नहीं आता कि कहां से शुरू करूं ??
जाने कितनी ही बातें हैं जो तुम्हें कहनी है लेकिन समझ नहीं आता कि उन बातों में भेद कैसे करूं कि कौन सी बात तुम्हें अभी कहूं कौन सी तुमसे मिलने पर या कौन सी बात तुमसे बातों बातों में कह दूं या फिर ऐसे ही लिखकर….
हर बार ये लिखकर कहना बाजी मार लेता है…तुम तो वजह जानते ही होना…भली भांति अवगत हो इस बात से कि जो बातें मैं चाहती हूं कि आजीवन तुम्हें स्मरण रहे उन्हें लिख देना ही उचित लगता है मुझे।
देख रहे होना कितनी आशावादी हो गई हूं मैं तुम्हारे प्रेम में… जो लड़की अगले क्षण को लेकर भी आश्वस्त नहीं होती थी कि…जीवन का कोई भरोसा नहीं वो हर दिन तुमसे मिलने के तुम्हारे साथ जीने के सपने संजो रही है वो भी इस आपदा की घड़ी में जब कब क्या हो जाए ये उस ईश्वर के अतिरिक्त कोई नहीं जानता।
आए दिन कोई ना कोई नई त्रासदी की खबर सुनने को मिल ही जाती है….ऐसा नहीं है कि मेरे मन में विचार नहीं आते मुझे दुख नहीं होता मेरा ह्रदय नहीं पसीजता लेकिन मैं नहीं लिखना चाहती उन चीजों के बारे में… मेरी कलम किसी भूखे को‌ ना तो रोटी दे सकती है ना ही किसी मीलों पैदल चलते हुए राहगीर को घर पहुंचने के साधन…ना ही दे सकती है वो किसी दोषी को दंड ना ही कम कर सकती है किसी पीड़ित की पीड़ा। मैं लिखने के स्थान पर करना पसंद करूंगी वो जिससे तनिक भी मदद कर सकूं इनमें से किसी की भी लेकिन हां…मेरी कलम हर बार हमारे प्रेम को लिख कर दे सकती है प्रेम को नए आयाम….ये परीचित करा सकती है इसे पढ़ने वालों को उस प्रेम से जिससे शायद बहुत लोग अनभिज्ञ है…. हमारे प्रेम को पढ़कर ज्ञात हो सकता है लोगों को कि प्रेम का एक रंग ये भी है।
जहां प्रेम गुलाब और महंगे उपहारों के आधीन  नहीं प्रेमी के हाथों से बालों में सजने वाला गजरा ही रिश्ते को जवां रखता है। 
मंहगे होटलों में खाना नहीं अपने हाथों से बनाएं गये बेसन के लड्डू रिश्ते का स्वाद बढ़ाते है।
जहां स्पोर्ट्स बाइक पर बैठ कर लंबा सफर नहीं  आधी रात को हाथों में हाथ डाल कुछ दूर साथ चलना जीवन के सफर को और भी गुलजार बनाता है।
कपल गोल्स के नाम पर एक दूसरे को चूमते हुए तस्वीरें नहीं पैरों में आलता लगा कर दोनों के पैरों की तस्वीर प्रेम को अलग आयाम देती है।
वो प्रेम जहां रूठे हुए प्रेमी को मनाने के लिए चिट्ठियां लिखी जाती है।
जहां प्रेम प्रदर्शन का विषय नहीं, क्योंकि प्रेमिका को सिर पर आंचल लिए हुए देखने से ज्यादा मनोरम दृश्य और कोई नहीं।
जहां प्रेम अनुभूति मात्र नहीं भाव है।
जहां प्रेमी/प्रेमिका को चांद की संज्ञा नहीं दी जाती क्योंकि प्रेम ईश्वर तुल्य है।

मैं मेरी कलम को दुख से दूर रखना चाहती हूं क्योंकि ये कलम प्रेम लिखती है मेरी ये कलम ईश्वर को समर्पित है मेरी ये कलम तुम्हें लिखती है।
और आज ये कलम फिर से लिखना चाहती है कि अब मैं तुम्हें सिर्फ कविताओं और कहानियों में ही नहीं प्रकृति में भी तलाशने लगी हूं…
बारिश तो अब हर रोज की ही बात है तो छत पर बैठ कर बारिश के बाद उन गूंथे हुए बादलों में तुम्हारी छवि ढूंढती हूं जब तेज हवा छूकर गुजरती है ना मेरे बालों को तो ऐसी अनुभूति होती है मानो तुम्हें छूकर आई हो और जिद कर रही हो मुझसे बालों को खोलने की और मेरे कानों में हौले से कुछ बुदबुदा कर चली गई हो कि “खुले बाल ज्यादा अच्छे लगते है तुम पर”। 
जब उड़ता हुआ कोई पत्ता छूता है मेरे अधरों को मेरे गालों को या मेरी पेशानी को तो लगता है तुमने रख दिया है कोई बोसा।

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तुमसे अतिरिक्त कुछ सोचना कठिन सा हो चला है। 
जब से तुम जीवन में आए होना हर वस्तु अपने अस्तित्व से अधिक सुंदर लगने लगी है।
मैं निखर रही हूं और हां थोड़ा बिगड़ भी रही हूं थोड़े नखरे बढ़ गये है थोड़ी शैतानियां बढ़ गयी है लेकिन इसका श्रेय भी तुम्हें ही जाता है… तुम्हीं कहते होना कि आती हूं तुम्हारे कंधे तक भी नहीं लेकिन चढ़ी रहती हूं सिर पर, मुझसे मेरा बचपना मांगा था तुमने तो अब परिणाम को लगाओ सिर माथे। तुम्हारी डांट में भी जो प्रेम है ना वो तो बहुतों के प्रेम में भी नहीं होता।
जब मिलेंगे ना मैं और तुम जैसे धरा और अंबर मिलते हैं उस क्षितिज पर…. तो हमारे जीवन का वो क्षितिज अंकित होगा ना जहां वो हमारे प्रेम की किताब का सबसे सुंदर पृष्ट होगा।
मुझे अमर प्रेम कहानी नहीं चाहिए लेकिन ये विश्वास है कि जब भी कोई सच्चा प्रेम करेगा ना तो हमारी कहानी मदद करेगी उसे अपनी प्रेम कहानी को सुंदर पड़ाव देने में।
तुम्हें क्या लगता है ??
मुझे नहीं समझ आ रहा कि मैंने ये क्यों लिखा… मुझे ये ही कहना था या कुछ और लेकिन मैं चाहती हूं कि तुम इसे संभाल कर सहेज कर रखो।
रखोगे ना ??

इसे लिखते हुए एक ही गाना जेहन में आ रहा है
“इश्क बिना क्या मरना यारा…. इश्क बिना क्या जीना
गुड़ से मीठा इश्क इश्क 
इमली से खट्टा इश्क….”


*मालूम नहीं क्या लिखा है…. आप सब बस पढ़ लेना… 😅😅😅थोड़ी खुद की कहानियों की तारीफ खुद ही की है🤭🤭🤭

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