Bachpan Shayari In Hindi | Poetry | I Miss My Childhood

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Bachpan Shayari In Hindi

जी करता है, पंख लगा कर

दूर गगन में उड़ जाऊँ

बचपन का बीता हर लम्हा

मुट्ठी में यूं भर लाऊं,

कीमती मोती जैसे वो पल

सदा उन्हें बस सहलाऊँ,

बीती यादों में यूं जी कर,

मन अपना मैं बहलाऊँ…


Bachpan Shayari In Hindi Poetry

Bachpan Shayari In Hindi Poetry


एक बचपन का जमाना था

जिसमे खुशियों का खजाना था,

चाहत चाँद को पाने की थी

पर दिल तितली का दीवाना था,

खबर ना थी कुछ सुबह की

ना शाम का ठिकाना था,

थक कर आना स्कूल से

पर खेलने भी जाना था,

माँ की कहानी थी

परियों का फसाना था,

बारिश में कागज की नाव थी

हर मौसम सुहाना था,

रोने की वजह ना थी

ना हंसने का बहाना था,

क्यों हो गए हम इतने बड़े

इससे अच्छा तो वो अपना बचपन का जमाना था!


वो बिना इंटरनेट और मोबाइल वाला जमाना….. 

वो शाकालाका बूम वाली पेंसिल सबको दिखाना….. 

वो मारियो को ड्रैगन से लड़ा कर उसकी रानी से मिलवाना….

वो बैड से कूदते वक़्त अपने आप को शक्तिमान बताना….

वो नागराज वाली कॉमिक्स को एक दिन में पूरा पढ़ जाना…..

हे भगवान् बस एक बार हमारा बचपन जरूर लौटाना….


वो सूरज ढलने के बाद भी मैच खेलते जाना….

वो लाइट जाने के बाद भूत बन कर सबको डराना….

वो बड़े से बड़ा मुद्दा पट्ट से सुल्टाना…..

वो किसी के घर की घंटी बजा कर भाग जाना….

लौटाना हो भगवान तो बस हमारा बचपन लौटाना……


वो गर्मी की छुट्टियों में नानी के घर जाना…..

वो कागज की कश्तियों को पानी में तैराना…..

वो दोस्तों के सामने खूब लंबी लंबी छोड़ते जाना….

वो बारिश के पानी में कूद कूद कर नहाना….

मुमकिन कहाँ है बचपन की सारी यादें लिख पाना….

हे भगवान् बस एक बार हमारा बचपन जरूर लौटाना…..


Bachpan Shayari

वह गलियां छूट गयीं, आँगन छूट गया,

अब तो बचपन का वह दामन छूट गया,

आज मेरे खिलौनों में एक उदासी नजर आई मुझे,

ना जाने कैसे यह साथ पावन छूट गया


बचपन के खिलौने आज शो पीस बन बैठे हैं,

मेरे सामने होकर भी वह मुझसे दूर हो बैठे हैं,

मिलता नहीं समय आज जरा सा भी उनके लिए,

ना जाने जीवन की व्यस्तता में हम किस तरह खो बैठे हैं


हाथों में आज लैपटॉप और मोबाइल फोन है,

खिलौने भी सोचते होंगे ना जाने यह कौन है,

बचपन में पूरे दिन साथ खेला करते थे मेरे,

ना जाने क्यों आज उनके साथ होकर भी वह मौन है


बचपन की आज दुनिया बदल गयी जरिया बदल गया,

लोगों का खिलौनों के प्रति देखने का नजरिया बदल गया,

शायद इसलिए उदास हो बैठे हैं खिलौने आज फिर,

बचपन की भावनाओं का वह दरिया बदल गया I


Bachpan Shayari In Hindi kavita

खो गए हैं हम इस दुनिया की भीड़ में

क्या करें अब तो बचपन भी खो दिया हमने

याद है हमें आज भी वो स्कूल की छुट्टी के बाद

भीड़ में से माँ बाबा का हमें यूं तलाश कर थामना

अब तो उससे ज्यादा भीड़ में खुद को खो दिया हमने

पर अब हमें क्यूँ माँ बाबा नहीं तलाशते.?

तब तो सिर्फ किताबों के बोझ कंधों में हुआ करता था

अब तो कंधों में ना जाने कितने बोझ सवार हैं

हां शायद अब हम बड़े हो गये हैं

अब तो खुद को अकेले संभाल कर चलना है

मगर ये दिल ♥️

आज भी उसी बचपन के याद में कैद होके रह गया है

आज ना जाने क्यों आँखें तरस रही हैं वो वक़्त दोहराने को

कंधों में बोझ लिए माँ बाबा का इंतजार करने को

बाहें तरस रही हैं उन्हें गले लगा कर जी भर के रोने को

मगर अफसोस अब बड़े हो गए मजबूर हो गए हैं

हम उनसे अपने आंसू छुपाने को….

 

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