Top 10 हिंदी कविता संग्रह | Purani hindi kavitayen

हिंदी कविता संग्रह

“अस्थिरता” हिंदी कविता

तप आयी है_____

स्थिरता, कुछ शीतल

कुछ गर्म पानी की लहरों सी,

मचल आयी है, _____

गीली बूंद चेहरे पर, सुगंधित

उभरती चसक, दोपहर की अगन सी,

रंग आयी है,____

कोरी बेकरारी, उड़ते कागज सी,

बसंत पक्षी, उदित संसेदा सी,

सिसक आयी है, ______

कुछ रिमझिम, भीगी तमयी

गुदगुदाती, हल्के शावाब सी,

अस्थिरता _______

उनकी याद लायी है l


 दोराहा हिंदी  कविता 

ज़िंदा होता अरमानों का,

मेरा स्वप्न सागर

शुष्क, ग्रीष्म के नयन कब्र में, छलकता

जीवन सुधा की प्यारी गागर,

मचली है, गंदे नाले के,

पानी में, तू चाँद बनकर,

निहारता, अपलक निगाहों से, सोचता,

दो राहे के बीच थम कर,

थाम लूंगा लहरों को,

पर, रोकती है पवित्रता,

सभ्यता के बंधन में जकड़ा

सामाजिकता,

ना जीने देगी, तुझको पाकर

(कविता) ‘कौन कुकुम ‘….?

कंकड़ कांटो से चुभ कर तू,

कौन कुकुम, जा रहा कहाँ l

खोये नैनों पर प्यार लिये,

सोये मुखड़े पर हर्ष लिये,

भूखे दिल पर,आस लिये,

तू कौन….? कुकुम जा रहा कहाँ…

उठता गिरता, पछताता सा

लाठी लिए, सहारा सा,

गरद,मलीन तू भेष बना,

तन है ढीला- ढाला सा,

चिथड़े कपड़ों पर गर्व लिये

भोली सहज प्रतिमा लिये,

तू कौन…? कुकुम जा रहा कहाँ…

चुभती शीत तुझ पर,

क्या लू नहीं पड़ती तन पर

भूख नहीं रहती पेट पर,

क्या प्यास नहीं रहती कंठ पर

ऐसा निर्जल, त्याग किए,

आंसू पर दुर्दिन भार लिए,

तू कौन…? कुकुम जा रहा कहाँ…

झुलसते पग तेरे नहीं,

क्या छाले रूदित करते नहीं

जब पड़ी शीत, कठिन रात,

क्या मन तेरा, रोता नहीं,

पैरों पर रुधिर का, वरदन

लिये,

सहनशील को,साथ लिए,

तू कौन…? कुकुम जा रहा कहाँ… l


‘आशा ‘ हिंदी कविता संग्रह

____एक कशिश है मेरी आशा की,

जो दर्द बना देती है,

एक पिपासा है मेरे दिल की,

जो आशा ही मिटा सकती हैl

वर्षों की संजोयी स्थिरता,

एक नजर में क्यों बिखर जाती है

अरमान भरे सरोवर में,

तेरी याद क्यों लहराती है l

पल वह क्या था, कलोल भरा

जब सोये थे,अरमां मेरे,

इन कोरी,जलती रातों में,

अब कजली क्यों भर आती हैl

एक राह मेरी,निराशा की,

जो दूर तुझे कर देती है,

एक आग है, मेरी ममता की,

मेरी ‘आशा’ ही मिटा सकती हैl


 ‘जागती प्रतीक्षा’ हिंदी कविता 

सोच कर देगी तू निमंत्रण,

ये मैं सोच रहा हूँ,

देख कर देखेगी तू हर क्षण,

यही मैं जोह रहा हूँ l

दिल होगा मेरा चंदन,

तभी गुल फेंक रहा हूँ,

है कैसी तेरी धड़कन,

वही मैं देख रहा हूँ l

दे गयी निगाहें, कंपन,

जिसे मैं पी रहा हूँ,

है प्यार भरा,ये उलझन,

फिर भी जी रहा हूँ l

रात आँखों,में है खेला,

फिर भी आग बना हूँ,

मिलने एक बार,तू आजा,

अब भी जाग रहा हूँ___


‘जलाना याद को’… हिंदी कविता संग्रह

कोंधती है, बिजुरी,

सीने पे,दिल धड़कता है,

गिरेगी डाल पर,न जाने क्या होगा…

उठती है,पलकें तब,

अंतर मचलता है,

पड़ेगी मार पर,न जाने क्या होगा….

बढ़ते हैं,राह पर,

कदम तेरे डगमगाते हैं,

रुकेंगे किसी बात पर,न जाने क्या होगा….

बैठ कर द्वार पर,

बदनाम हुआ जाता हूँ,

मरता हूँ,प्यार पर,न जाने क्या होगा…..

जो तेरा होगा, वही मेरा होगा,

जलाना याद को,जब अंधेरा होगा,

देख कर चेहरे को,तुम उदास न होना,

थामना हाथ मेरा, जब दिल घायल होगा ____


हिंदी कविता
‘सुलगते ख्याल’

क्यों सींच दिया, तन्हाइयों को,

क्यों बुझा दिया अंगारों को l

वह पल भी क्या अजीब था,

जब दूर खड़ा किनारे पर,

तेरे मिलने के क्षण गिनता था,

तेरी खुश्बू पर ही जिंदा था……

घर की खिड़की के पार कहीं,

फिर उठा दो अदाओं को,

क्यों सींच दिया तन्हाइयों को,

क्यों बुझा दिया अंगारों को l

कहाँ गयी,मीठी कशिश,

मेरी अविरल प्यास में,

तेरी यादों को मैं पीता था,

तेरे ख्वाबों में वक़्त बीता था l


  मेरी बहना हिंदी कविता

नया सवेरा,आज हुआ पर,

क्यों मन मेरा रोया हैl

नवजीवन की खुशी के आगे,

आंगन बाजी शहनाई है,

अंतर मन की सोयी ममता ने,

फिर से आँख जगाई है l

चारों तरफ एक कोलाहल,

पर मन ने,सपना ओढ़ा है,

नया सवेरा आज हुआ पर,

क्यों मन मेरा रोया है l

उमस पड़ी है,स्नेह की बदली,

नयनों में,वर्षा झूमी है,

झूम उठी हैं खुशियाँ,

वर्षा ने सावन को चूमा हैl

‘बहना’ के जीवन सुख पर,

माँ ने अरमां संजोया है,

नया सवेरा आज हुआ पर,

क्यों मन मेरा रोया है l

ये तो शुभ दिन चंद चांदनी का,

मन ने मन को जोड़ा है,

कौन रोक सकता है,जल को,

‘बहना’ है – तुझे तो बहना है l

रूठ गयी है,बूढ़ी ज्योति,

बाबुल ने टुकड़ा खोया है,

नया सवेरा आज हुआ पर,

क्यों मन मेरा रोया है l

वर्षों की डाली झर चली,

जग को जिसने अपनाया है,

कैसे रुकता वेग पवन का,

नव प्रीत मन में, जगाया है l

जाना ही था, जाओ बहना,

आज ना कोई रोका है,

नया सवेरा आज हुआ पर,

क्यों मन मेरा रोया हैl

दुनिया में हैं, और भी रिश्ते,

जिन पर ऐसा, त्याग कहाँ,

तेरे रिश्ते के, प्यार के पीछे,

बदले की कोई आस कहाँ l

भुला न देना, जुगनू देश को,

चांदनी को, तूने ओढ़ा है,

नया सवेरा आज हुआ पर,

क्यों मन मेरा रोया है l

लेकर पथ को, झुक चरणों पर,

तूने पुष्प, खिलाए हैं,

हर्षित होगी, मंजिल पथ की,

साथ राखी के, वादे हैं l

देना है कुछ न ‘मेरी बहना’

मात्र स्नेह का जोड़ा है,

नया सवेरा आज हुआ पर,

क्यों मन मेरा रोया है l


हिंदी कविता  “अधीर पंछि”

तुम अधीर पंछि बन के,

मंजिल गगन को माना है,

पल भर की है, मेरी मंजिल,

तिनके को साथी जाना है l

तुम रवि के, मेहमान बने,

विश्वास का साथ निभाया है,

पर मैं हूँ, एक आवारा बादल,

पर्वत को, गले लगाया है l


हिंदी कविता संग्रह

‘मैंने क्या पा लिया’…?

कोई शून्य में, मुझे पुकारा _____

मैं उठ पड़ी,

श्वेत बदन,

सिहर पड़ी,

खो गयी, उज्जवलित किरणों संग_.

आयी थी,

प्यार सजाने,

ललचायी थी,

तड़प गयी, शीतल बाहें ____

भूल गयी,

संकीर्ण बदन,

मचल गयी,

गयी सितारों को अपनाने _____

वे हीरे सी,

चमकती किरणें,

मैं धुएं सी,

उड़ती, मन न जीत सकी _____

वह निष्ठुर मन,

मैं टूक हुई,

मेरा बिखरा तन,

फिर सूख गया, मेरा जीवन _____

गिर गयी,

आसमाँ से,

धरा बैठ गयी,

झूम उठी थी, प्यास बुझाने ____

था, काँप गया,

नया अस्तित्व,

किसी को भा गया,

पुकारा था, दूर किसी ने _____

प्रेम प्यास से,

मुझे समेटे,

चूम गयी,

त्रशित, सुहानी हरि- पाती_____

स्नेह, प्यार को,

फिर मेरे,

डूबे ख्याल को,

न देख सका, बेदर्दी आसमाँ _____

बिखर गयी,

निष्ठुर किरणें,

ज्वलित बाहों ने,

मेरा जीवन, सोख लिया _____

मिट गयी मैं,

खो गयी,

फिर उड़ गयी,

न बुझ पायी, तृष्णा मेरी _____

मिटा दिया,

अग्नि पिंड ने,

जो जन्म दिया,

थी पहले, अब हूं मैं ओस बिन्दु ___

मैंने क्या पा लिया l


हिंदी गीत कविता संग्रह

‘गर्दिश का सितारा’

गर्दिश का सितारा है,

शांति का उजाला है,

जान से भी प्यारा, हिंदुस्तान… हिंदुस्तान… हिंदुस्तान.. l

हम वीरों पर नाज करे,

जो रंग सुमन पे डाला है,

जान से भी प्यारा………….

हम पर कोई आँख नहीं, हम भी किसी के भार नहीं,

आज़ाद भूमि कहलाती है,क्यों दीन पसारे हाथ कहीं,

हम फिर से खेत बनाएंगे, जिसको सदियों में पाया है,

जान से भी प्यारा……….

जो है पुरानी माटी में, वह आज नया बन जाएगा,

जो धूल उड़ी थी खेतों में,वह सबकी जान बन जाएगा,

छाँव दिलाए धरती को, जो धूप से हमने निकाला है,

जान से भी प्यारा है……….

हम हैं सभी के,सब हैं हमारे, हर हिंदुस्तानी प्यारा है,

प्यारा है ईमान,वफा, इंसान सभी से आला है,

सब मिल उसको याद रखें, जो अम्बर ज़मी बनाया है,

जान से भी प्यारा……..

टुकड़ों पे क्यों, आँख जमाये, हर अंगुली पे सहारा है,

पानी है, हर पग के नीचे, आसमान रखवाला हैl

आओ श्रमकण साथ बहाएं, फिर से बादल छाया है,

जान से भी प्यारा……….

हिंदुस्तान…. हिंदुस्तान… हिंदुस्तान……..

 

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