क़ुदरत का करिश्मा हिंदी शायरी

 क़ुदरत का करिश्मा

ज़र्रे ज़र्रे में क़ुदरत का निशाँ पाया

ज़मीं को फ़र्श, अर्श को साएबाँ पाया

शम्स कर गया रौशन गोशा-गोशा जहाँ का 

चाँद-सितारों के नूर से सजा आसमाँ पाया

जुट गए अँधेरी बस्तियों को रौशन करने में

जुगनुओं ने जब शहर भर को चराग़ाँ पाया…

क़ुदरत का करिश्मा

ज़मीं को ज़रख़ेज़ करता, देता गर्मी से राहत भी

फ़लक पर बिना आग का उठता ऐसा धुआँ पाया

ज़िंदा रहने को मिली मुफ़्त में पानी व हवा

पहाड़ों की क़तारों को अपना पासबाँ पाया

रुत बदली, बदले नज़ारे, बदली ज़िन्दगी भी

फ़लसफ़ा-ए-हयात समझाने को ख़िज़ाँ पाया

देखकर ग़िलाफ़ अनाजों पर अश-अश कर उठा

मैंने क़ुदरत की किसी चीज़ को नहीं राएगाँ पाया

रेशमी धागे को एक नन्हे से कीड़े ने बनाया

हैरत है, मोतियों को सीपियों में निहाँ पाया

यह क़ुदरत का करिश्मा ही तो है, जो तुम ने

एक तनावर दरख़्त को एक बीज में पिन्हाँ पाया

इतनी नेमतों से हमें रब ने नवाज़ा है “तबस्सुम”

पर जब बारी शुक्राने की आई ख़ुदको बेज़ुबाँ पाया

_Empty

Word meaning

ज़र्रे ज़र्रे में = कण कण में

निशाँ = sign, mark

अर्श = आसमान

साएबाँ = छत, शामियाना, canopy

शम्स = सूरज

गोशा-गोशा = कोना-कोना

जहाँ = दुनिया,,,नूर = रौशनी

चराग़ाँ = दीपों से सजी हुई, दीपोत्सव

ज़रख़ेज़ = उपजाऊ,,,,फ़लक = आसमान

पासबाँ = हिफ़ाज़त करने वाला

फ़लसफ़ा-ए-हयात = philosophy of life

ख़िज़ाँ = autumn season, पतझड़ का मौसम

ग़िलाफ़ = cover

अश-अश कर उठना = बेसाख़्ता वाह वाह कह उठना

राएगाँ = बेकार, useless

निहाँ / पिन्हाँ = छुपा हुआ

तनावर दरख़्त = मज़बूत पेड़

यह भी पढ़ें 

Leave a Comment