अनकहे अल्फ़ाज // Ankahe apne alfaz

अनकहे अल्फ़ाज


लफ्ज़ ही नहीं जो बयां करे दर्द मेरा,

अपनों ने एहसास दिलाया कि पराया हूँ मैं,

दिल ने भी आभास कराया कि ठुकराया हूँ मैं I

अनकहे अल्फ़ाज


कहीं गुम हो जाएं,

सही और गलत की दुनिया से दूर 

एक दूसरे की आँखों में कहीं, हम खो जाएं 

चलो ना कहीं गुम हो जाएं I


काली रात की तन्हाई में ये बारिश…

समझ नहीं आता, ये मेरी तन्हाई का शोर है या तुम्हारे ना होने का..


तन्हा हो फिर भी मुस्कुराना पड़ता है,

ये जिन्दगी है जनाब,

यहाँ अपनों से दूर जाना पड़ता है I


कभी अकेलेपन का शोर सुना है

कभी खुली आँखों से सपना बुना है,

हां कभी कभी होती हैं कुछ गुस्ताखियां,

कभी गुस्ताखियों के लिए खुद को दोषी चुना है I


ना ठिकाना है,

ना कोई घर,

कैसे बनाएगा अपना वजूद ये अनजाना, जो है बेघर!


धड़कनें तेज सी हो जाती है आज भी,

जब तुम्हारे शहर का नाम भी आता है I


तुम्हारे लिए हर वक़्त अपना मोबाइल जेब में दबाए रखता हूं,

और तुम रहो मेरे साथ, इसलिए तुम्हारा वॉलपेपर लगाए रखता हूं I


खफा होकर रूठ जाना चाहते हो तो, रूठ जाओ

अपने रूठने मनाने के किस्से बहुत हैं,

हां माना कि मतलबी हो गये हम,

क्यूँकि शायद अब जिम्मेदारियां बहुत हैं I


छोड़ा भी नहीं जाता, एक भ्रम है जो पाले बैठे हैं,

इस मन में तुमको ही संभाले बैठे हैं I


फैसले अपने सुनाते हैं सब,

बदल गये हैं ऐसा बताते हैं सब,

ना पूछा किसी ने की हालत है क्या,

अब अपनी ही अपनी चलाते हैं सब I


है प्यारी सी बात कोई, या हंसी जज़्बात कोई,

मैं ना जानूँ दिल न जाने,

है हकीकत या ख्वाब कोई I


मेरे प्यार का अभिमान किसी काम का न रहा,

उसके दिल में मेरा नाम किसी काम का न रहा,

मैं रखता हूं आज भी जिसको ख्वाबों में,

आज से वो ख्वाब भी किसी काम का न रहा I


कभी रब के सहारे कभी खुद के,

होठों पर मुस्कान सजाते हैं,

इस तरह दीवाने अपना नाम कर जाते हैं I


तरस जाते हैं तुमसे बात करने को,

तरसाना अच्छा लगता है क्या,

खोए खोए से रहने लगे हो,

अब कोई और सच्चा लगता है क्या.?


उसकी मेहरबानी से हुए थे हम भी पूरे, कुछ पल के लिए,

लेकिन अब देखो रह गये ना अधूरे…..


देखा पुरानी तस्वीर तो तुम फिर याद आयी,

मेरी आँखों में फिर बरसात आई,

बढ़ाया हाथ तेरे हाथ थामने के लिए,

पर याद तेरे मेरे बीच की वो दूरी आई I


अभी तो और सहना है,

कभी हंसना हंसाना है,

कभी रोना रुलाना है,

कभी यादों के मंजर में उसे पाकर के खोना है,

अभी तो और जीना है,

तेरी यादों में जागना है तेरी यादों में सोना है I


दर्द दिल का मैं अपने सुनाती रही,

रात भर पास तुमको बुलाती रही,

तुम आओगे नहीं ये पता था हमें,

फिर भी तुम्हारे आने की आश लगाती रही I


इतनी सी इल्तजा है इस दिल की,

एक ऐसी शाम हो,

तुम्हारे भी होठों पर सिर्फ मेरा ही नाम हो I


सही अफवाह उड़ी थी, कि दुनिया खत्म हो जाएगी,

किसी की काल खत्म हुई,

किसी की आज खत्म हुई I


उसके ना होने पर भी मुझे,

उसके मेरे साथ होने का अहसास हुआ,

कुछ इस तरह से वो मेरे लिए, बेहद खास हुआ I


तू मेरे अंदर की साँस है, तुझसे ही जुड़ी मेरी हर आश है,

इसीलिए तू सबसे खास है,

मेरे हर पल में तेरी ही अरदास है I


जरूरी हैं, कुछ फासले भी हमारे दरमियाँ…

कुछ अपनों के लिए, और कुछ अपने सपनों के लिए I


कांप जाती है मेरी रूह तक इश्क़ के नाम से,

दिन तो काट लेता हूँ पर डर लगता है शाम से…


जिन्दगी की किताब का वो पेज हो तुम,

जिसे पढ़ना भी मुश्किल, और फाड़ना भी नामुमकिन….


उसकी अदाओं के जैसा उसकी आदतों में भी कहर है,

सच कहते हो जनाब उसके शहर के शामों में भी जहर है I


कुछ अजनबियों से लगाव हो रहा है,

और कुछ अपनों से अलगाव हो रहा है,

किसी से सिर्फ प्यार हो रहा है, तो किसी से बेशुमार हो रहा है I


एक अजनबी  से ही कह दी, मैंने दास्तां अपनी,

किसी अपने को मैं, अपने गम सुनाता कैसे,

आँखों में आँसू और दिल का दर्द,

किसी अपने के सामने दिखाता कैसे I


हर दिन मैं तुमसे मिलती हूँ, जब जब मैं मुस्कुराती हूँ,

अपनी मुस्कुराहट में, मैं तुम्हारा ही अक्श पाती हूँ I


मेरे होठों की हँसी और मेरे दिल की कहानी है वो,

तुम्हें लगता है बहता हुआ पानी है वो I


मेरे हर ख्वाब और हर आश में तुम हो,

मेरे दिल की धड़कन और मेरे हर अहसास में तुम हो,

तुम सुनो या न सुनो, मेरे हर अल्फाज़ में तुम हो I


हाथों में चूड़ियाँ,

पैरों में पायल की बेड़ियाँ,

कैसे संभालेगी इतने सारे रिश्ते,

जो खेलती है अभी भी गुड्डे और गुडियां I


साथ निभानी की झूठी आश दिखाते हैं,

बीच समंदर में लाकर प्यासा होने का अहसास कराते हैं I


कहानी तो वही और वो ही शुरू हुई है,

पर अब उसमे हमारा किस्सा नहीं है,

किरदार तो है मेरा, पर उसमें मेरा हिस्सा नहीं है I


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